नैनपुर– मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू राष्ट्रीय फसल अवशेष प्रबंधन नीति में फसल कटाई के पश्चात बची हुई फसल अवशेष में 2014 के अंतर्गत किसानो से अपील की जाती है कि वे खेतो में आग न लगाए। नरवाई जलाने से न केवल पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचती है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता को भी कम करता हैं । इससे भूमि में उपस्थित लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते है। तथा फसलो की उत्पादकता प्रभावित होती है। साथ ही इससे वायु प्रदुषण बढ़ता हैं। जो मानव स्वास्थ्य पशु एवं पर्यावरण के लिए हानिकारक है। फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपक्रम जैसे बेलर, स्ट्राँ शेपर, मलर, रोटावेटर कम्बाईन हास्खस्टर मंत्री का उपयोग कर सकनवाई को मिट्टी में मिलाए।
प्रशासन ने नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना निर्धारित किया है। 2 एकड़ से कम भूमि पर 2500 रूपय, 2 से 5 एकड़ के लिए 5000 रूपये, 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 15000 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उक्त सभी किसान बंधुओ से अपील है कि नरवारी में आग न लगाएं। पर्यावरण संरक्षण में अपना सहयोग प्रदान करें। एवं होने वाली प्रशानिक कार्यवाही से बचे। आज एक विज्ञप्ति कृषि विभाग नैनपुर के माध्यम से किसानों के लिए जारी की है और अपील की गई है कि शासन के नियमों का पालन करें और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में सहयोग कर अधिक से अधिक फसल लगाकर लाभ कमाए
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