विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने दिए नदी संरक्षण एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन के महत्वपूर्ण सुझाव
नरसिंहपुर, 10 जुलाई 2026. प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को सिंगरी नदी पर निर्मित गैबियन मेशनरी संरचनाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के उद्देश्य से तैयार की गई इन संरचनाओं की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
मंत्री श्री पटेल ने कहा कि गैबियन संरचनाएं वर्षा जल के संचयन, मिट्टी के कटाव की रोकथाम तथा भू-जल स्तर में सुधार लाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इन नवाचारों को ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट के स्थायी समाधान के रूप में प्रभावी बताते हुए इनके व्यापक निर्माण पर बल दिया।
इस दौरान उनके साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र सक्सेना तथा प्रख्यात भू-जल वैज्ञानिक डॉ. सुनील चतुर्वेदी भी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने सिंगरी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को नियमित एवं सतत बनाए रखने के साथ-साथ नदी तट पर स्थित ग्रामों एवं बसाहटों से निकलने वाले तरल अपशिष्ट के वैज्ञानिक उपचार एवं प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि उपचारित जल को ही नदी में प्रवाहित किया जाए, जिससे नदी की स्वच्छता, जल गुणवत्ता और पारिस्थितिक संतुलन लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
मंत्री श्री पटेल ने अपने विधानसभा क्षेत्र नरसिंहपुर के ग्राम मगरधा में सिंगरी नदी के पुनर्जीवन एवं कायाकल्प कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि महज 2-3 महीनों के अल्प समय में ही नदी का सौंदर्यीकरण किया गया है। गंदे पानी की रोकथाम के लिए प्रभावी वाटर फिल्टर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, साथ ही आमजन की सुगम आवाजाही के लिए पुलिया का निर्माण भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि सिंगरी नदी को ‘सदानीरा’ (वर्षभर प्रवाहमान) बनाने का यह प्रयास सामूहिक संकल्प, जनसहभागिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह पहल दर्शाती है कि समन्वित प्रयासों से किसी भी चुनौतीपूर्ण कार्य को संभव बनाया जा सकता है।
ज्ञातव्य है कि सिंगरी नदी पुनर्जीवन परियोजना के प्रथम चरण में ग्राम पंचायत मगरधा, रोसरा, नकटुआ, रानी पिपरिया सहित नरसिंहपुर शहर से लगे ग्रामों में नदी तटों के संरक्षण, गेबियन संरचनाओं के निर्माण तथा अपशिष्ट जल के उपचार के लिए आधुनिक शोधन इकाइयों की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। विशेष रूप से ग्राम नकटुआ में अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार हेतु आधुनिक ट्रीटमेंट व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे नदी में प्रदूषण को प्रभावी रूप से रोका जा सके। इन प्रयासों का उद्देश्य नदी के कटाव को रोकना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना तथा प्रदूषण मुक्त नदी तंत्र विकसित करना है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए जनभागीदारी, आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक और प्रभावी प्रशासनिक समन्वय का समन्वित रूप से कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सिंगरी नदी पुनर्जीवन परियोजना जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत ग्रामीण विकास की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी तथा भविष्य में यह परियोजना देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित होगी।
निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत श्री गजेन्द्र सिंह नागेश, श्री रामसनेही पाठक, श्री महंत प्रीतमपुरी गोस्वामी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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